जादुई चश्मा और डरपोक खरगोश: आत्मविश्वास की एक महान गाथा
हिमालय की गोद में बसा एक विशाल और हरा-भरा जंगल था, जिसे 'नीलगिरी वन' कहा जाता था। यह जंगल इतना सुंदर था कि यहाँ की हवाओं में भी संगीत घुला रहता था। इस जंगल में हज़ारों जीव-जंतु मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन हर जगह की तरह यहाँ भी कुछ कमियाँ थीं। इसी वन के एक छोटे से कोने में 'पिंकू' नाम का एक खरगोश रहता था।
पिंकू खरगोश दिखने में जितना सुंदर और कोमल था, उसका दिल उतना ही छोटा और कमजोर था। उसे जंगल का सबसे "डरपोक जीव" माना जाता था। आज की यह कहानी पिंकू के उसी डर से बहादुरी तक के सफर की है, जो हमें सिखाती है कि हमारी असली शक्ति कहाँ छिपी है।
पिंकू का डर और समाज का ताना
पिंकू की हालत ऐसी थी कि अगर पेड़ से एक सूखा पत्ता भी गिरता, तो वह उछलकर झाड़ियों में छिप जाता था। हवा के झोंके से सरसराहट होती, तो पिंकू को लगता कि कोई शिकारी आ गया है। जंगल के अन्य जानवर, जैसे बंदर, लोमड़ी और यहाँ तक कि छोटे चूहे भी पिंकू का मज़ाक उड़ाते थे।
बंदर अक्सर पिंकू के पास आकर अचानक ज़ोर से चिल्लाते— "भागो पिंकू, शेर आया!" और बेचारा पिंकू बिना पीछे मुड़े मीलों दूर भाग जाता। जब वह रुकता और पीछे देखता कि कोई नहीं है, तब बंदर खिलखिलाकर हँसते। पिंकू को बहुत बुरा लगता था। वह सोचता, "क्या मैं कभी बहादुर नहीं बन पाऊंगा? क्या भगवान ने मुझे सिर्फ डरने के लिए ही बनाया है?"
उसकी आँखों में आँसू आ जाते। उसे लगने लगा था कि वह इस जंगल में रहने के लायक ही नहीं है।
वह रहस्यमयी शाम और पुराना चश्मा
एक शाम, पिंकू बहुत उदास होकर जंगल के उस हिस्से की ओर निकल गया जहाँ कोई नहीं जाता था। वह एक पुरानी गुफा के पास पहुँचा। वहाँ कूड़े और सूखे पत्तों के ढेर के बीच उसे कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। जब उसने पास जाकर देखा, तो वह एक अजीब सा दिखने वाला, सुनहरे फ्रेम का चश्मा था। उसके शीशे थोड़े धुंधले थे लेकिन उनमें से एक अनोखी चमक निकल रही थी।
तभी, पास के एक पुराने बरगद के पेड़ से 'ओली' नाम का बुद्धिमान उल्लू उड़ा और पिंकू के पास आकर बैठ गया। ओली को पूरा जंगल जानता था क्योंकि वह बहुत अनुभवी था। पिंकू ने पूछा, "ओली दादा, यह क्या है?"
ओली ने अपनी आँखें घुमाईं और एक गंभीर आवाज़ में कहा, "पिंकू, तुम्हें अंदाज़ा भी नहीं है कि आज तुम्हारे हाथ क्या लगा है! यह कोई साधारण चश्मा नहीं है। यह प्राचीन समय का 'शौर्य चश्मा' है। इसे जो भी पहनता है, उसे दुनिया की हर मुसीबत छोटी दिखने लगती है और उसके अंदर पहाड़ जैसी ताकत आ जाती है। इसे पहनने वाला कभी किसी से नहीं डरता।"
जादू का असर: एक नया पिंकू
पिंकू ने कांपते हाथों से वह चश्मा उठाया और अपनी आँखों पर लगा लिया। जैसे ही उसने चश्मा लगाया, उसे सब कुछ अलग दिखने लगा। चश्मे के शीशों ने दुनिया को इतना साफ़ और चमकीला बना दिया था कि पिंकू को लगा जैसे उसके शरीर में बिजली दौड़ गई हो।
उसने अपनी छाती चौड़ी की और एक गहरी सांस ली। अचानक, उसे पास की झाड़ियों में एक सरसराहट सुनाई दी। पहले वाला पिंकू होता तो अब तक गायब हो गया होता, लेकिन "जादुई चश्मे" वाले पिंकू ने मुड़कर देखा और ज़ोर से चिल्लाया— "बाहर आओ! जो कोई भी हो, मैं तुमसे नहीं डरता!"
झाड़ियों से एक सियार निकला। सियार ने जब देखा कि एक छोटा सा खरगोश उसे चुनौती दे रहा है, तो वह हैरान रह गया। पिंकू की आँखों में एक अजीब सी आग थी। सियार बिना कुछ कहे दुम दबाकर भाग गया। पिंकू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे यकीन हो गया कि चश्मा वाकई जादुई है।
बहादुरी के कारनामे
अगले कुछ दिनों में पूरा जंगल दंग रह गया। पिंकू अब झाड़ियों में नहीं छिपता था, बल्कि शान से खुले मैदानों में घूमता था।
लोमड़ी को सबक: एक दिन 'चालाक लोमड़ी' ने पिंकू को घेरने की कोशिश की। पिंकू भागा नहीं, बल्कि उसने लोमड़ी की आँखों में आँखें डालकर कहा— "अगर अपनी खैर चाहती हो, तो यहाँ से चली जाओ, वरना मैं तुम्हारी सारी चालाकी एक पल में निकाल दूँगा।" लोमड़ी ने सोचा कि शायद पिंकू को कोई गुप्त शक्ति मिल गई है, और वह भाग खड़ी हुई।
नदी में बचाव: जंगल की तेज़ बहती नदी में एक हिरण का बच्चा फंस गया था। बड़े-बड़े जानवर किनारे खड़े देख रहे थे। पिंकू ने आव देखा न ताव, पानी में छलांग लगा दी। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर हिरण के बच्चे को किनारे तक धकेला।
पूरे नीलगिरी वन में चर्चा होने लगी कि पिंकू अब डरपोक नहीं, बल्कि 'महाबली पिंकू' बन गया है। अब कोई उसका मज़ाक नहीं उड़ाता था, बल्कि सब उसे सम्मान की नज़र से देखते थे।
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वह दिन जब 'जादू' टूट गया
एक दोपहर, पिंकू एक ऊँचे टीले पर खड़ा होकर जंगल की रखवाली कर रहा था। अचानक तेज़ हवा चली और पिंकू का पैर फिसल गया। वह लुढ़कते हुए नीचे गिरा और उसका वह "जादुई चश्मा" पत्थर से टकराकर चकनाचूर हो गया।
पिंकू के हाथ-पांव कांपने लगे। उसने टूटे हुए शीशों को देखा और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगा। "हे भगवान! अब मैं क्या करूँगा? मेरा चश्मा टूट गया! मेरी सारी बहादुरी खत्म हो गई! अब मैं फिर से वही पुराना डरपोक पिंकू बन गया हूँ।"
तभी, एक विशाल भेड़िया झाड़ियों से निकला। वह कई दिनों से पिंकू पर हमला करने का मौका ढूंढ रहा था। पिंकू ने देखा कि उसके पास चश्मा नहीं है। वह डर के मारे सुन्न हो गया। वह भागने ही वाला था कि तभी उसे ओली उल्लू की आवाज़ सुनाई दी।
असली जादू का रहस्य (The Revelation)
ओली दादा उड़कर आए और बोले, "पिंकू! भागो मत। अपनी जगह खड़े रहो!"
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पिंकू रोते हुए बोला, "दादा, चश्मा टूट गया! अब मैं लड़ नहीं सकता।"
ओली हँसा और बोला, "मूर्ख पिंकू! उस चश्मे में कभी कोई जादू था ही नहीं। वह तो पास के शहर के किसी सैलानी का गिरा हुआ एक साधारण चश्मा था। जब तुमने उस नदी में हिरण को बचाया, तब भी तुम धुंधले शीशों से देख रहे थे। जब तुमने सियार को भगाया, तब भी वह सिर्फ प्लास्टिक और कांच का टुकड़ा था।"
पिंकू हैरान रह गया। "तो फिर मैं इतना बहादुर कैसे बना?"
ओली ने समझाया, "जादू चश्मे में नहीं, तुम्हारे विश्वास में था। तुमने मान लिया कि तुम बहादुर हो, इसलिए तुम्हारा दिमाग और शरीर बहादुरी से काम करने लगा। डर सिर्फ एक विचार है, और बहादुरी एक फैसला (Decision) है। तुमने वह फैसला लिया था।"
पिंकू को बात समझ आ गई। उसने देखा कि भेड़िया उसकी ओर बढ़ रहा है। पिंकू ने अपनी आँखें बंद कीं और अपनी उस ताकत को महसूस किया जो उसने पिछले कुछ दिनों में दिखाई थी। उसने एक बड़ा पत्थर उठाया और पूरी ताकत से भेड़िये के पास फेंका और एक शेर की तरह दहाड़ा। भेड़िये को लगा कि बिना चश्मे के पिंकू और भी खतरनाक हो गया है, और वह जंगल छोड़कर भाग गया।
निष्कर्ष: कहानी की शिक्षा (Moral of the Story)
पिंकू को अब किसी चश्मे की ज़रूरत नहीं थी। वह जान गया था कि आत्मविश्वास (Self-Confidence) ही दुनिया का सबसे बड़ा जादू है।
शिक्षा: हमारी क्षमताएं हमारे उपकरणों या बाहरी चीजों पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती हैं कि हम अपने बारे में क्या सोचते हैं। अगर आप खुद पर भरोसा करते हैं, तो आप बड़े से बड़े डर को हरा सकते हैं।
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