अफवाह का धमाका: क्या सच में बादल गिरा? (Part-2)
(पिछली कहानी का रिकैप: चुहिया ने चिल्लाकर सबको डरा दिया था कि बादल गिर गया है और पूरी मंडली तालाब की ओर भागी थी।)
अब आगे का रोमांच:
जैसे ही चुहिया ने तालाब की ओर इशारा किया, पूरे जंगल में खलबली मच गई। कुत्ता डर के मारे अपनी पूँछ दबाकर झाड़ियों में छिप गया, बिल्ली पेड़ पर चढ़ गई और हमारे बुजुर्ग तो अपनी लाठी छोड़कर भागने की तैयारी करने लगे।
बिल्ली ऊपर पेड़ से चिल्लाई, "अगर बादल गिरा है, तो अब आसमान नीचे आ जाएगा! भागो, वरना हम सब दब जाएंगे!"
तभी खरगोशी ने सबको रोका और बहादुरी दिखाते हुए कहा, "ठहरो! अगर हम सब भागेंगे तो सच का पता कैसे चलेगा? चलो, चलकर देखते हैं कि बादल का टुकड़ा कैसा दिखता है। क्या वह रुई जैसा सफेद है या बर्फ जैसा ठंडा?"
तालाब का रहस्य:
सब लोग डरते-डरते, एक-दूसरे का हाथ पकड़कर तालाब के किनारे झाड़ियों के पीछे छिप गए। तभी अचानक पानी के बीच से एक विशालकाय आवाज़ आई— "धपाक! धम्म!"
चुहिया चीखी, "वो देखो! पानी में धमाका हुआ!"
सबने आँखें फाड़कर देखा, तो वहां कोई बादल का टुकड़ा नहीं था। बल्कि तालाब के सबसे शरारती 'गंगू मेंढक' ने अपने दोस्तों के साथ 'हाई जंप' का मुकाबला शुरू कर रखा था। गंगू मेंढक किनारे के एक ऊँचे पत्थर से सीधे पानी के गहरे हिस्से में छलांग लगा रहा था।
गंगू मेंढक जब बाहर निकला, तो उसने देखा कि किनारे पर कुत्ता, बिल्ली, खरगोशी और बुजुर्ग सब ऐसे खड़े हैं जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो।
मेंढक खिलखिलाकर हंसा और बोला, "अरे! आप सब यहाँ क्या मेला देखने आए हो? देखो, मेरी छलांग इतनी ज़ोरदार थी कि किनारे पर सोई हुई चुहिया रानी को लगा कि आसमान ही फट गया है!"
मजेदार अंत:
यह सुनकर बुजुर्गों ने अपना सिर पकड़ लिया। खरगोशी ने चुहिया को चिढ़ाते हुए कहा, "बड़ा आया बादल गिरने वाला! कल को अगर कोई पत्ता गिरेगा, तो तू कहेगी कि पहाड़ टूट गया है!"
बेचारी चुहिया ने अपनी आँखें मलीं और धीरे से बोली, "अगली बार से मैं पहले चश्मा लगाऊँगी, फिर चिल्लाऊँगी!"
पूरा जंगल ठहाकों से गूँज उठा। उस दिन सबने सीखा कि डर हमेशा अक्ल को घास चरने भेज देता है।
कैसे खरगोश के ऊपर जब आसमान गिरने लगा
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