अफवाह का धमाका: जब आसमान गिरने लगा!
हमारे गांव के बुजुर्ग अक्सर एक पुरानी कहावत सुनाते थे कि "एक बार बादल टूटकर जमीन पर गिर गया था।" गांव के समझदार लोग तो इसे मजाक समझते थे, लेकिन कुछ नटखट और चुलबुले किरदारों के लिए यह एक खौफनाक सच था। ऐसी ही एक नटखट किरदार थी— खरगोशी।
जंगल की सैर:
एक सुहानी सुबह खरगोशी अपने साथियों के साथ जंगल की सैर पर निकली। इस अनोखी मंडली में एक नन्हीं चुहिया, दो पक्के दोस्त, एक कुत्ता, एक बिल्ली और दो अनुभवी बुजुर्ग शामिल थे। चलते-चलते सब थक गए, तो नन्हीं चुहिया हाफते हुए बोली, "भाई! थोड़ी देर यहीं आराम कर लेते हैं।"
चुहिया एक पेड़ के नीचे सुस्ताने लगी और बाकी लोग पास ही के घने जंगल और तालाब की खूबसूरती देखने निकल पड़े।
वह जोरदार धमाका:
उसी जंगल के तालाब में कुछ शरारती मेंढक रहा करते थे। जैसे ही चुहिया की आँख लगने वाली थी, तभी एक बड़े से मेंढक ने पानी से बाहर निकलकर पत्थर पर एक ज़ोरदार छलांग लगाई— "धम्म! धम्म!"
आवाज इतनी तेज़ थी कि चुहिया डर के मारे उछल पड़ी और चीखने लगी, "भागो! भागो! अनर्थ हो गया!" उसकी चीख सुनकर खरगोशी, कुत्ता, बिल्ली और बुजुर्ग सब भागे-भागे आए।
खुराफात का खुलासा:
खरगोशी ने घबराकर पूछा, "क्या हुआ चुहिया? तू इतना क्यों चिल्ला रही है?"
चुहिया कांपते हुए बोली, "वही हुआ जिसका डर था... बादल टूटकर गिर गया!"
सबके होश उड़ गए। बुजुर्गों ने पूछा, "कहाँ गिरा? हमें दिखाओ!" चुहिया उन्हें उसी तालाब के पास ले गई जहाँ मेंढक छलाँग लगा रहे थे।
जब सब वहां पहुंचे, तो देखा कि मेंढक बड़े मजे से पानी में गोते लगा रहे थे। खरगोशी ने फिर पूछा, "कहाँ है गिरा हुआ बादल?" चुहिया ने उसी पत्थर की तरफ इशारा किया।
तभी पानी से एक मेंढक बाहर निकला और खिलखिलाकर हंसने लगा। वह बोला, "अरे बुद्धू चुहिया! कोई बादल-वादल नहीं गिरा, हम तो बस पानी में खेल रहे थे और कूद रहे थे। वह आवाज हमारे कूदने की थी!"
कहानी कैसी लगी कमेंट में बताए आगे की कहानी पार्ट 2 में
कैसे खरगोश के ऊपर जब आसमान गिरने लगा (Part-2)
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